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क्या मनुस्मृति में ऐसा लिखा है ब्राह्मण शुद्र और शुद्र ब्राह्मण हो सकता है?

*आक्षेप : क्या मनुस्मृति में ऐसा लिखा है ब्राह्मण शुद्र और शुद्र ब्राह्मण हो सकता है?* खंडन: इस जन्म में अंत तक ज्यो की त्यों ही जाती रहती है, इस श्लोक के विवेचन हेतु हम साथ मे अगले श्लोक की विवेचना करेंगे मनुस्मृति अनुसार सप्तम जन्ममें नीच सन्तानको ब्राह्मणत्वादिकी प्राप्ति- शूद्रायां ब्राह्मणाज्जातः श्रेयसा चेत्प्रजायते । अश्रेयान् श्रेयसी जातिं गच्छत्यासप्तमाद् युगात् ॥ ६४॥ ब्राह्मणसे शूदामें उत्पन्न (पारशव-१०८) जातिकी कन्या ब्राह्मणसे विवाह कर कन्या उत्पन्न करे ( इस प्रकार ) वह सप्तम जन्म (पीढ़ी) में श्रेष्ठ जातिको प्राप्त करती है ॥ ६४ ॥ विमर्श-इस श्लोकका विशद आशय यह है कि पारशव (१०८) जातिकी कन्या ब्राह्मणसे विवाहकर कन्या उत्पन्न करे, वह उत्पन्न हुई कन्या पुनः, ब्राह्मणसे विवाह कर पुनः कन्या ही उत्पन्न करे; इसी क्रमसे छः जन्मतक उत्पन्न होती हुए कन्याएं ब्राह्मणसे विवाह करती हुई कन्याओंको उत्पन्न करती रहें तो वह कन्या सप्तम जन्म (सातवी पीढ़ी) में ब्राह्मणसे जिस सन्तान (पुत्र या पुत्री) को सत्पन्न करती है, वह सन्तान नीच क्षेत्रज होकर भी वीर्यकी प्राधान्यतासे सप्तम जन्ममे...

पतिव्रता

#पतिव्रता_स्त्रियों_के_कर्तव्य_का_वर्णन महाभारत अनुशासन पर्व के दानधर्म पर्व के अंतर्गत अध्याय 123 में पतिव्रता स्त्रियों के कर्तव्य का वर्णन हुआ है।[1] युधिष्ठिर का प्रश्न- वैशम्‍पायन जी कहते हैं- जनमेजय! युधिष्ठिर ने पूछा- सम्पूर्ण धर्मज्ञों में श्रेष्ठ पितामह! साध्वी स्त्रियों के सदाचार का क्या स्वरूप है? यह मैं आपके मुख से सुनना चाहता हूँ। उसे मुझे बताइये। भीष्म द्वारा शाण्डिली और सुमना का संवाद का वर्णन करना- भीष्म जी कहते हैं- राजन! देवलोक की बात है- सम्पूर्ण तत्त्वों को जानने वाली सर्वज्ञा एवं मनस्विनी शाण्डिली देवी से केकयराज की पुत्री सुमना ने इस प्रकार प्रश्न किया- ‘कल्याणि! तुमने किस बर्ताव अथवा किस सदाचार के प्रभाव से समस्त पापों का नाश करके देवलोक में पदार्पण किया है? ‘तुम अपने तेज से अग्नि की ज्वाला के समान प्रज्वलित होे रही हो और चन्द्रमा की पुत्री के समान अपनी उज्ज्वल प्रभा से प्रकाशित होती हुई स्वर्ग-लोक में आयी हो। निर्मल वस्त्र धारण किये थकावट और परिश्रम से रहित होकर विमान पर बैठी हो। तुम्हारी मंगलमयी आकृति है, तुम अपने तेज से सहस्रगुनी शोभा पा रही हो। ‘थोड़...

रामायण मे सीता माता का विवाह समय उम्र क्या थी?

रामायण और पूर्व और वर्तमान  चलचित्र (धारावाहिक) :-- सभी प्रकार के रामायण के नाम पर जो अभी जन सामान्य के समाने परोसा जा रहा है वह उन्हें अधिक अंशों में भगवान के अवतार के मूल प्रयोजन से इतर ही लेजा रहा है जो भविष्य में लोगों को शास्त्रों और धर्म का विरोधी बना ही देगा । जैसे रामायण में जो भगवती सीता और प्रभु राम का आयु दिखाया जा रहा है वह सर्वथा अनुचित है ,वाल्मीकि कृत रामायण में जो आयु बताया है उसको ताक पर रख के उनकी आयु दिखाई गयी रामायण जो आयु बताई है वह कुछ इस प्रकार है :-- श्रीराम से विवाह के समय सीता की आयु 6 वर्ष थी, इसका प्रमाण वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड में इस प्रसंग से मिलता है। इस प्रसंग में सीता, साधु रूप में आए रावण को अपना परिचय इस प्रकार देती हैं-श्लोक उषित्वा द्वादश समा इक्ष्वाकूणां निवेशने। भुंजना मानुषान् भोगान् सर्व कामसमृद्धिनी।1। तत्र त्रयोदशे वर्षे राजामंत्रयत प्रभुः। अभिषेचयितुं रामं समेतो राजमंत्रिभिः।2। परिगृह्य तु कैकेयी श्वसुरं सुकृतेन मे। मम प्रव्राजनं भर्तुर्भरतस्याभिषेचनम्।3। द्वावयाचत भर्तारं सत्यसंधं नृपोत्तमम्। मम भर्ता महातेजा वयसा पंच...