रामायण मे सीता माता का विवाह समय उम्र क्या थी?
रामायण और पूर्व और वर्तमान चलचित्र (धारावाहिक) :--
सभी प्रकार के रामायण के नाम पर जो अभी जन सामान्य के समाने परोसा जा रहा है वह उन्हें अधिक अंशों में भगवान के अवतार के मूल प्रयोजन से इतर ही लेजा रहा है जो भविष्य में लोगों को शास्त्रों और धर्म का विरोधी बना ही देगा ।
जैसे रामायण में जो भगवती सीता और प्रभु राम का आयु दिखाया जा रहा है वह सर्वथा अनुचित है ,वाल्मीकि कृत रामायण में जो आयु बताया है उसको ताक पर रख के उनकी आयु दिखाई गयी रामायण जो आयु बताई है वह कुछ इस प्रकार है :--
श्रीराम से विवाह के समय सीता की आयु 6 वर्ष थी, इसका प्रमाण वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड में इस प्रसंग से मिलता है। इस प्रसंग में सीता, साधु रूप में आए रावण को अपना परिचय इस प्रकार देती हैं-श्लोक
उषित्वा द्वादश समा इक्ष्वाकूणां निवेशने।
भुंजना मानुषान् भोगान् सर्व कामसमृद्धिनी।1।
तत्र त्रयोदशे वर्षे राजामंत्रयत प्रभुः।
अभिषेचयितुं रामं समेतो राजमंत्रिभिः।2।
परिगृह्य तु कैकेयी श्वसुरं सुकृतेन मे।
मम प्रव्राजनं भर्तुर्भरतस्याभिषेचनम्।3।
द्वावयाचत भर्तारं सत्यसंधं नृपोत्तमम्।
मम भर्ता महातेजा वयसा पंचविंशक:।
अष्टादश हि वर्षाणि मम जन्मनि गण्यते।।
अर्थ-सीता कहती हैं कि विवाह के बाद 12 वर्ष तक इक्ष्वाकुवंशी महाराज दशरथ के महल में रहकर मैंने अपने पति के साथ सभी मानवोचित भोग भोगे हैं। मैं वहां सदा मनोवांछित सुख-सुविधाओं से संपन्न रही हूं।तेरहवे वर्ष के प्रारंभ में महाराज दशरथ ने राजमंत्रियों से मिलकर सलाह की और श्रीरामचंद्रजी का युवराज पद पर अभिषेक करने का निश्चय किया।
तब कैकेयी ने मेरे श्वसुर को शपथ दिलाकर वचनबद्ध कर लिया, फिर दो वर मांगे- मेरे पति (श्रीराम) के लिए वनवास और भरत के लिए राज्याभिषेक।वनवास के लिए जाते समय मेरे पति की आयु 25 साल थी और मेरे जन्म काल से लेकर वनगमन काल तक मेरी अवस्था वर्ष गणना के अनुसार 18 साल की हो गई थी।
इस प्रसंग से पता चलता है कि विवाह के बाद सीता 12 वर्ष तक अयोध्या में ही रहीं और जब वे वनवास पर जा रहीं थीं, तब उनकी आयु 18 वर्ष थी। इससे स्पष्ट होता है कि विवाह के समय सीता की आयु 6 वर्ष रही होगी। साथ ही यह भी ज्ञात होता है कि श्रीराम और सीता की उम्र में 7 वर्ष का अंतर था।
सनातन धर्म में #विवाह एक संस्कार है एवं संस्कार उचित समय में हो तो कल्याणप्रद और फल दाई है अन्यथा उसका कोई तुक ही नहीं है जैसे खेतों में उचित समय पर ही फसल लगता है तो उचित होता है वैसे ही संस्कार में भी सोंचना चाहिए ।
शास्त्रों में भगवान राम को धर्म का मूर्त रूप बताया है
#रामो_विग्रह_वान_धर्म: अतः उनके द्वारा किये गये एक कार्य अधार्मिक और अशास्त्रीय नहीं अतः सीरियल बाजों को ध्यान रखना चाहिए शास्त्रसिद्धान्त में अपनी मनमुख काट छांट न करें और न ही जन सामान्य को सीरिया के नाम् पर दिग्भ्रमित करें ।
।। जय श्री राम ।।
.
सभी प्रकार के रामायण के नाम पर जो अभी जन सामान्य के समाने परोसा जा रहा है वह उन्हें अधिक अंशों में भगवान के अवतार के मूल प्रयोजन से इतर ही लेजा रहा है जो भविष्य में लोगों को शास्त्रों और धर्म का विरोधी बना ही देगा ।
जैसे रामायण में जो भगवती सीता और प्रभु राम का आयु दिखाया जा रहा है वह सर्वथा अनुचित है ,वाल्मीकि कृत रामायण में जो आयु बताया है उसको ताक पर रख के उनकी आयु दिखाई गयी रामायण जो आयु बताई है वह कुछ इस प्रकार है :--
श्रीराम से विवाह के समय सीता की आयु 6 वर्ष थी, इसका प्रमाण वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड में इस प्रसंग से मिलता है। इस प्रसंग में सीता, साधु रूप में आए रावण को अपना परिचय इस प्रकार देती हैं-श्लोक
उषित्वा द्वादश समा इक्ष्वाकूणां निवेशने।
भुंजना मानुषान् भोगान् सर्व कामसमृद्धिनी।1।
तत्र त्रयोदशे वर्षे राजामंत्रयत प्रभुः।
अभिषेचयितुं रामं समेतो राजमंत्रिभिः।2।
परिगृह्य तु कैकेयी श्वसुरं सुकृतेन मे।
मम प्रव्राजनं भर्तुर्भरतस्याभिषेचनम्।3।
द्वावयाचत भर्तारं सत्यसंधं नृपोत्तमम्।
मम भर्ता महातेजा वयसा पंचविंशक:।
अष्टादश हि वर्षाणि मम जन्मनि गण्यते।।
अर्थ-सीता कहती हैं कि विवाह के बाद 12 वर्ष तक इक्ष्वाकुवंशी महाराज दशरथ के महल में रहकर मैंने अपने पति के साथ सभी मानवोचित भोग भोगे हैं। मैं वहां सदा मनोवांछित सुख-सुविधाओं से संपन्न रही हूं।तेरहवे वर्ष के प्रारंभ में महाराज दशरथ ने राजमंत्रियों से मिलकर सलाह की और श्रीरामचंद्रजी का युवराज पद पर अभिषेक करने का निश्चय किया।
तब कैकेयी ने मेरे श्वसुर को शपथ दिलाकर वचनबद्ध कर लिया, फिर दो वर मांगे- मेरे पति (श्रीराम) के लिए वनवास और भरत के लिए राज्याभिषेक।वनवास के लिए जाते समय मेरे पति की आयु 25 साल थी और मेरे जन्म काल से लेकर वनगमन काल तक मेरी अवस्था वर्ष गणना के अनुसार 18 साल की हो गई थी।
इस प्रसंग से पता चलता है कि विवाह के बाद सीता 12 वर्ष तक अयोध्या में ही रहीं और जब वे वनवास पर जा रहीं थीं, तब उनकी आयु 18 वर्ष थी। इससे स्पष्ट होता है कि विवाह के समय सीता की आयु 6 वर्ष रही होगी। साथ ही यह भी ज्ञात होता है कि श्रीराम और सीता की उम्र में 7 वर्ष का अंतर था।
सनातन धर्म में #विवाह एक संस्कार है एवं संस्कार उचित समय में हो तो कल्याणप्रद और फल दाई है अन्यथा उसका कोई तुक ही नहीं है जैसे खेतों में उचित समय पर ही फसल लगता है तो उचित होता है वैसे ही संस्कार में भी सोंचना चाहिए ।
शास्त्रों में भगवान राम को धर्म का मूर्त रूप बताया है
#रामो_विग्रह_वान_धर्म: अतः उनके द्वारा किये गये एक कार्य अधार्मिक और अशास्त्रीय नहीं अतः सीरियल बाजों को ध्यान रखना चाहिए शास्त्रसिद्धान्त में अपनी मनमुख काट छांट न करें और न ही जन सामान्य को सीरिया के नाम् पर दिग्भ्रमित करें ।
।। जय श्री राम ।।
.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें