राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ :- हिंदुत्व के नाम पर छल

मित्रों आप हिन्दू हैं और आपको अपने हिन्दू होने पर गर्व होता है। यदि ऐसा है तो आप उन लोगों के प्रति अवश्य ही क्रोधित होंगे जिन्होंने धर्म को या यूं कह लीजिए कि भगवा को, पैसा कमाने का धंधा बना लिया है, और यदि सबकुछ जानते हुए भी आप उनलोगों का जो धर्म को धंधा बना रखे है का, विरोध सिर्फ इसलिए नही करते है क्योंकि वो आप उनसे जुड़े पार्टी या उस संगठन के हिस्से है जिसके आप कार्यकर्ता हैं तो ये जान लीजिए कि आपने अपने पूर्वजों के दिये पहचान को त्याग कर चन्द नेताओ के चाकर बन चुके है, आपको भले पता न हो परन्तु आप गुलाम हो चुके हैं।..... सामान्य हिन्दुओं को ये बात पता नही होती है कि हिन्दुओं के पारम्परिक व्यवस्था में घुस कर कौन अधर्म फैला रहा है या यूं कह लीजिए भगवा कपड़े में कौन लुटेरा, कौन चोर धर्म का धंधा कर रहा है? आप लोग कहते है ना कि साधु सन्त पाखण्ड कर रहे है, वो लोगों को लुटते हैं। पर आप ये नही जानते कि आखिर कौन कर रहा हैं?... आइये मैं आपको बताता हूँ, अनेक पारम्परिक आखाड़ो में एक है जुना अखाड़ा, आज के समय यह अखाड़ा राजनीति का अड्डा और धर्म का धंधा करने वाला केंद्र बन चुका है। इस अखाड़े का प्रमुख छल बल से आरएसएस बीजेपी के गुप्त सहयोग से अखाड़ा प्रमुख बना है, और ये बात समाज मे किसी छूपी नही है।संघ चाहता है कि वो शंकराचार्य के प्रमुख पीठों में से कम से कम एक पीठ को अपने कब्जे में ले ले, पर वो लाख प्रयास करने के पश्चात भी इसमे सफल नही हुआ और सुप्रीम कोर्ट से उसे मुह की खानी पड़ी। पर संघ ने शास्त्रीय दृष्टि अयोग्य, अपने एक कार्यकर्ता को जुना अखाड़ा का प्रमुख बनवा दिया है, अब जुना अखाड़ा के माध्यम से जबरदस्त धंधा और घटिया राजनीति की जा रही है। जुना अखाड़ा अर्थात संघी अखाड़ा की सच्चाई जानने के बाद यदि आप चुप रहते हैं विरोध के एक शब्द भी आपके मुख से नही निकलते तो ये जान लीजिए कि आपकी आने वाली पीढ़ी तो छोड़िए आप अभी ही गुलाम हो चुके हैं क्योंकि आपके लिए धर्म से बढ़कर कोई संगठन या पार्टी हो चुकी है अतः आपने अपने उन पूर्वजों को अपमानित कर दिया जो धर्म और सत्य के लिए अपना गला कटा लिए परंतु किसी के सामने झूके नही।..... जुना अखाड़ा एक तरह से संघ का अखाड़ा ही है जैसे संघ के स्वामी वासुदेवानंद, संघ द्वारा बनाये एक निर्लज्ज फर्जी शंकराचार्य है जो सुप्रीम कोर्ट में ये सिद्ध होने के पश्चात भी कि वो शंकराचार्य नही हो सकते, वो संघ बीजेपी के सह पर अपने को सर्वत्र शंकराचार्य घोषित करके आद्यजगतगुरु भगवान शंकराचार्य की परम्परा का अपमान कर रहे हैं।...... जुना अखाड़ा अर्थात संघी अखाड़ा वही अखाड़ा है जिसने एक सिख विवाहित महिला सुखविन्दर कौर उर्फ "राधे माँ" को पैसे लेकर महामंडलेश्वर का सर्टिफिकेट दिया। ये वो लोग है जो स्वयं तो शास्त्र की मर्यादा का पालन करते नही अपितु किसी भी ऐरे गैरे को 10-15 लाख में सीधे महामंडलेश्वर बना देते हैं। राधे माँ की सच्चाई किसी से छुपी नही नही है, 10 हजार में आपके घर आके ठुमके लगाएगी और थोड़ा और पैसा बढ़ा दीजिये तो ये तथाकथित संघी अखाड़े द्वारा बनाई महामंडलेश्वर आपके गोद मे भी बैठ के नाचेगी। आप सोचिए कि यदि ये अखाड़े अपने जगदगुरु शंकराचार्यों के अंतर्गत होते तो क्या इस तरह से कोई दो कौड़ी की नचनिया कभी सन्यासियों के एक प्रमुख पद को पैसे के बल पर प्राप्त कर सकती थी? आप बताइए धर्म को धंधा किसने बनाया? ढोंगी लोगो को साधु सन्त महामंडलेश्वर किसने बनाया? उत्तर है, यही संघी अखाड़े ने। इसी प्रकार शास्त्र विरुद्ध जाकर हिजड़ो की अखाड़ा बनाना उसमे एक हिजड़े को महामंडलेश्वर घोषित करना ये भी संघी अर्थात जुना अखाड़े कार्य है। इसी प्रकार साधुओं में भी शास्त्र विरुद्ध जाकर दलित शब्द का उपयोग करके अपनी गन्दी राजनीति के लिए संघ ने दलिट महामंडलेश्वर घोषित किया। आप कुम्भ में देखिए आपको चारो तरफ महामंडेलश्वर टैग लिए अनेक लोगो के पंडाल मिल जाएगा जिसमे अधिकतर वो लोग है जो ऐसे ही जुना अखाड़े द्वारा 10-15 लाख देकर, शास्त्र विरुद्ध फर्जी महामंडलेश्वर बनाये गए हैं। अरे ये सब तो छोड़िए अगर कल को सन्नी लियोनी भी आ जाये तो कुछ लाख में ही जुना अखाड़ा उसको भी पवित्र करके महामंडलेश्वर घोषित कर देगा। एक फर्जी मुस्लिम Prostitute महिला Shabanam को महामंडलेश्वर घोषित किया जा चुका है। जुना अखाड़े के मनमाने अधर्म के खिलाफ कोई भी कुछ नही कर सकता क्योंकि उसके ऊपर संघ बीजेपी की कृपा बरस रही है और ये इसलिए कि इस धंधे से हुई कमाई का एक बड़ा हिस्सा संघ को चंदे में जाता है। आज पैसे के बल पर फर्जी शंकराचार्य, फर्जी महामंडेलश्वर फर्जी पुजारी बनाये जा रहे है आप सोच रहे होंगे ऐसा क्यों हो रहा है तो मित्रों ऐसा इसलिए हो रहा है कि संघ की मूल विचारधारा में सनातन धर्म शास्त्र का सम्मान है ही नही, वो एक अब्राहमिक विचारधारा को मानते है जिनका धर्म जन्म के बाद से लेकर मृत्यु तक ही होता है, जन्म के पूर्व और मृत्यु के पश्चात के कर्म फल के सिद्धान्त को वो मानते ही नही, अर्थात वो केवल देह की उत्पत्ति से अन्त तक को ही अर्थात देहवाद को ही धर्म समझते हैं इसलिए ही वो पद, प्रतिष्ठा, पैसा के बल पर मनमाना अब्राहमिक विचारधारा को हिन्दू धर्म के नाम पर स्थापित करना चाहते है और वो ये सब हिन्दुओं के पारम्पारिक सन्यासियों के व्यवस्थाओं में घुस कर करना चाहते है और कर भी रहे हैं। अब आप बताइए कि नकली साधु सन्त बनाना, पैसा कमाना और अपनी गन्दी राजनीति के माध्यम से धर्म को क्षति कौन संगठन पहुँचा रहा है? आपकी आत्मा क्या कहती है हिन्दुओ के धर्म सम्बन्धी परम्परा से इन संगठनों को बाहर निकालना चाहिए कि नही? आज सिर्फ एक जुना अखाड़ा के माध्यम से संघ, अयोग्य और सर्वथा अनुचित लोगों को हमारे धार्मिक शुद्ध व्यवस्थाओं में घुसा रहा है यदि कल को ये किसी असली पीठ पर अपना शंकराचार्य बना लिया तब क्या होगा सोचिए? इसने वैसे शंकराचार्यों के महत्व को कम करने के लिए अनेक फर्जी शंकराचार्य बना रखे हैं और जो असली हैं उन्हें तरह तरह से बार बार झुठे आरोपो में अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से बदनाम करवा रहा है जिससे सामान्य हिन्दू समाज की निष्ठा असली शंकराचार्यों के प्रति कम हो जाए, जिससे शास्त्र सम्मत शुद्ध हिन्दू विचारधारा से लोग ज्यादा से ज्यादा कट जाए और घूमफिर कर संघ के फर्जी विचारधारा को अपना कर वर्णाश्रम और उसपे आधारित कर्म सिंद्धान्त को त्याग दे जिससे सम्पूर्ण हिन्दू समाज चन्द उद्योगपतियों के आर्थिक गुलाम बन जाए और बाद में उस पैसे का उपयोग करके हिन्दुओ को अब्राहमिक संस्कृति का गुलाम भी बनाया जा सके। इस रहस्य को समझना कोई कठिन नही है बस आप ये सोचिए कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि देश मे अमीरी गरीबी की खाई लगातार बढ़ रही है। अमीर और अमीर होते जा रहे हैं तथा गरीब और गरीब। आज देश की 70% सम्पत्ति मात्र 1% लोगों के पास आ गयी है इसी तरह यदि चलता रहा तो कल को भारत की लगभग 90% से भी अधिक सम्पत्ति चन्द लोगों के पास आ जायेगी और सारा का सारा समाज इनका आर्थिक गुलाम बन जायेगा। एक बार आर्थिक गुलाम बन गया तो हिन्दू धर्म संस्कृति समाप्त होते देर नही लगेगा। ये समस्या तब हुई जब इस देश मे जाति आधारित कर्म व्यवस्था समाप्त हुई और कोई भी पैसे के बल पर किसी का कार्य छीन कर करने को स्वतंत्र हो गया अतः सारे काम धीरे धीरे अमीर लोगों के पास चला गया और गरीब बेचारा आत्महत्या करने पर विवश हुआ। मित्रो जातियाँ मिट जाने पर कभी कर्म सिद्धान्त नही लग सकता क्योंकि कर्म सिद्धान्त जन्मना जाति व्यवस्था पर ही आधारित था। जिसमे प्रत्येक जाति केवल अपना ही कर्म कर सकती थी दूसरे का नही इसी को गीता में जातिधर्मा कहा गया है और अर्जुन इसी जातिधर्मा के नष्ट होने को भी युद्ध न करने का एक महत्वपूर्ण कारण बता रहा था। पर संघ क्या कर रहा है? संघ तो जन्मना जाति को ही मिटा देना चाहता है जिससे कर्म सिद्धान्त पुनः लागू न हो सके और कर्म बंधंन न रहे और इस प्रकार सारा समाज अंग्रेजो के जैसे अब्राहमिक और चन्द लोगों पे आर्थिक पराधीन हो जाये। अतः आप तय कीजिए कि आपको सनातन धर्म और उसकी व्यवस्था चाहिए या संघी अब्राहमिक धर्म और व्यवस्था चाहिए? जय सनातन धर्म राम #सनातनी

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