शिवरात्रि मे भांग प्रयोग का निषेध
भगवान् शिव का नाम लेकर गांजा, भांग, चरस आदि सेवन !
भूतभावन भगवान् भोलेनाथ नशे की किसी भी पदार्थ का सेवन करते हों, ऐसा हमको आजतक किसी भी शास्त्र में नहीं दिखा ।
विजया शब्द का अर्थ भांग भी होने से कुछ लोग वेद में आये विजया शब्द का अर्थ भांग करते हैं, जबकि भगवान् शिव के धनुष का नाम विजया है और सभी आचार्यों ने अपने भाष्य में धनुष ही अर्थ किये हैं ।
मूलमंत्र में भी विजया के बाद धनुष का उल्लेख होता है
"विज्यं धनु: कपर्दिनो विशल्यो बाणवाँ२ उत।"
शिवपुराण, लिंगपुराण, स्कंदपुराण, पद्मपुराण आदि में भगवान् शंकर के चरित्र आये हैं, किन्तु भांग, गांजा पीने का वर्णन कहीं भी नहीं है ।
यहां तक कि भगवान् आद्य शंकराचार्य रचित शिवमानस-पूजा-स्तोत्र में भगवान् शिव को चढ़ने वाले सभी पदार्थों का कल्पना किया गया है और उसमें गांजा, भांग का नाम कहीं भी नहीं आया है ।
इसीलिये अपने दुर्व्यसन को भगवान् शिव पर आरोपित करने का पाप न करें !
जबकि हमारे धर्मशास्त्रों में तो आया है ~~
"विजया कल्पमेकं च दश कल्पं च नागिनी।
मदिरा कल्पसहस्राणि धूमसंख्या न विद्यते ।।"
अर्थात् भांग खाने वाला एक कल्प ,संखिया खाने वाला दश कल्प, शराब पीने वाला हजारों कल्प तथा धूम्रपान करनेवाला कितने कल्पों तक नरक गामी होगा, इसकी संख्या नहीं है ।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें