वामपंथी आर्य समाज द्धारा फैलाया गया झूठ *हनुमान जी सुग्रीव बाली आदि पुंछ वाले कपि(बंदर) नही थे* *उसका खंडन* सभी सनातनी तक यह बात फैलावे अपने बच्चो सत्य समजावे। अंग्रजो का गुप्त षडयंत्र वामपंथी आर्य समाज प्रारम्भ से ही अपनी मनमानी और कुत्सित मानसिकता का परिचय देता रहा है। *जो बातें इनके मत को पुष्ट करती हैं, मात्र उन्हें ही प्रामाणिक मानते हैं और शेष जो बातें इनके मस्तिष्क की क्षमता के बाहर होती हैं, उन्हें ये मिलावटी कहते हैं।* दयानन्द सरस्वती से पूर्व इस देश में ग्रंथों के *प्रक्षिप्त होने या अप्रामाणिक* होने का कोई प्रसङ्ग नहीं दिखता है। *इसीलिए जर्मन, रूसियों एवं अंग्रेजों ने थियिसोफिकल सोसाइटी के माध्यम से आर्य समाज की स्थापना और विस्तार करवा कर इस नए भ्रम को प्रोत्साहित किया।* अंग्रेज़ों का षड्यंत्र था की भारत अपने धर्म शास्त्र अौर परंपरा गत धर्मगुरु शंकराचार्यो वैष्णवाचार्यो से दुर हो।ईसलिए शास्त्र मे मिलावट है ऐसा झुठ फैलाने गुप्तरुप से यह संस्था की स्थापना करवायी अौर हमारी सनातन गुरकुल शिक्षा नष्ट करवायी। उस समय के तात्कालिक विद्वानों ने बिना किसी विशेष पर...
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