सोशियल मिडिया मे वेदमंत्र की मर्यादा का उल्लंघन

#वेदघोष_के_विड़ीयों_का
#सोशियलमिड़ीया_में_दुष्प्रचार
सामूहिक यज्ञों आदि का ऐसा व्यसन हुआ हैं कि कुछ अच्छे से अच्छे वैदिकों !  इस सोशियल मिड़ीया में भी  अनधिकृतों -->  जनेऊ-रहितों(व्रात्य),शाखारण्ड,शूद्र,म्लेच्छ,
नित्य-सन्ध्योपासनारहित-द्विजों तथा पतित-ब्राह्मणों के मध्य #वेदमंत्रघोष_के_विड़ीयो अपलोड़ किया करतें हैं..

जिसको आपका परिचय हैं वह तो जानते ही हैं कि आपमें या आपके शिष्य में कितनी सक्षमता हैं। यह सब विद्यालय तक सिमित रहे तो ही शास्त्र की मर्यादा हैं- "#श्रुतं_मे_गोपाय || तैत्तरीय शि०१/४/१।।

और न तो यह व्यवसायीकरण की श्रृंखला में आता है कि उसकी प्रायोगिक विज्ञापन(जाहेरात करनी)चाहिये। हम सबको समादर पूर्वक निवेदन करतें हैं कि ऐसा अनुचित कार्य न हो।।

कलियुग से पहिले न तो कैमेरे थे और न तो विड़ीयो-शूटिंग के साधन, फिर भी अध्ययन-अध्यापन की आर्ष-पद्धति सुरक्षित थी ..

और आज न तो स्व-स्वशाखा का कहीं अध्ययन हो रहा हैं और न तो स्व-स्व शाखा के उपनयन -- ये सब द्विज की वैकल्पिक कल्पना भी सार्थक नहीं, क्योंकि परशाखीय जनेऊ, नित्यकर्म, जनेऊ और समस्त संस्कार तथा  यज्ञादि कर्म स्वशाखीय न हुएँ तो निरर्थक ही हैं...

यहाँ सोशियल-मिड़ीया चाहे वह वॉट्सएप हो, चाहे वह फेसबुक हो या अन्य कोई प्रसाधन; सभी इसके श्रवण के अधिकारी न होने के कारण से (ऐसी जगहों पर )वैदिक विड़ीयो अपलोड़ करना वेद के मर्मों पर प्रहार करना जैसा ही हैं ।  हे वैदिको ! जरा #श्रावणी_उपाकर्म का संकल्प भी उठाकर पढ़ लेना तो भी पता चल ही जायेगा कि अनधिकारीयों के आगे वेदोच्चार की कोई मर्यादा नहीं रहती... "( #नाब्रह्मचारिणे #नातपस्विने #नासंवत्सरोषिताय #नाप्रक्त्रेनुब्रूयात् ०००आदि*।।शु-यजुर्वेदीय  सर्वानुक्रम अ-४/१३।।)"

हमने वैदिक लेखित-सस्वरांकन वाले रुद्रपाठ का विड़ीयो को अपलोड़ किया हुआ  दैखा हैं, कोई अनधिकारी यदि उसमें से तोतलाकर बोलने का अनधिकृत प्रयत्न करता हैं तो दोष किसको लगेगा ? सभी में यह विचारणीय हैं...
सोशियल मिड़ीया में वेदोच्चार के ओड़ीयो-विड़ीयो डा़लने वाले सुन लिजिये । आप के डाले ओड़ीयो-विड़ीयो को वारंवार सुन कर अनधिकारी भी वेद मंत्र गुनगुनातें हैं। कुछलोग तो कुछ हद तक वेदमंत्र जैसे तैसे बोल भी लिया करते हैं। फिर आप सबकी ही आपत्ति रहती हैं कि फलाना ढीमक़ा वेद के लिये अनधिकारी होनेपर भी ऐसा करता हैं वैसा करता हैं। यह सब आपके अज्ञानता के ही कारण अनधिकारीयों की वेदमंत्रोच्चार में उपज होती रहती हैं। सोशियल मिड़ीया में रहे कुछ ब्राह्मण भी पतित होने के कारण अनधिकारी होतें ही हैं। इस तरह अनधिकारीयों को भी प्रबुद्ध कहे जानेवाले शास्त्रीय भाषा में अज्ञ वेदपाठी अनधिकारीयों को परोक्षरिति से वेदाध्ययन करवा रहे हैं।
वैदिकमंत्र, वैदिक विड़ीयो आदि के लिये यह सोशियल मिड़ीया के स्थान अयोग्य हैं... सभी वैदिको को यह मानना चाहिये ,, और सभी को प्रयत्न पूर्वक  पालन भी करना चाहिये..

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