शुद्रों को पढ़ने नहीं दिया जाता था

शुद्रों को पढ़ने नहीं दिया जाता था कहने बालों जरा इस पर ध्यान दो ।
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#पठन्_द्विजो_वाक्_ऋषभत्वम्_ईयात् |
#स्यात्_क्षत्रियो_भूमि_पतित्वम्_ईयात् ||
#वणिक्_जनः #पण्य_फलत्वम्_ईयात् |
#जनः #च_शूद्रो_अपि_महत्त्वम्_ईयात् ll
                         (वा०रा०१/१/१००)

भावार्थ: इस रामायण को ब्राह्मण पढ़े तो वेद शास्त्रों में पारंगत हो, क्षत्रिय पढ़े तो पृथ्वी पति हो वैश्य पढ़े तो उसका अच्छा व्यापार चले और शूद्र पढ़े तो उसका महत्त्व अर्थात अपनी जाति में श्रेष्ठत्व बढ़े या उन्नति हो ।

अब कोई बातयेगा यँहा पढ़ने का क्या अर्थ होता है? बिना सनातन धर्म के ज्ञान के जो विधवा विलाप करतें हैं वे अपने कथित संविधान और वामपन्थ के इतिहास का चश्मा हटता के देखें ।

हे ! शूद्रों वामपंथियो , नेताओं, मुल्लों ,ईसाइयों बौद्ध , और कथित समाज सुधारकों एवं नमाज़ियों के चक्कर मे आके सनातन धर्म का अपमान न करें अन्यथा आपकी  ही हानि है ।

                           ।।   जय श्री राम  ।।

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